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ब्रिटिश कालीन भू-राजस्व प्रणाली स्थायी बंदोबस्त ,रैय्यतवाड़ी व्यवस्था एवं महालवाड़ी व्यवस्था आधुनिक भारत का इतिहास
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1793 ई० में कार्नवालिस ने कंपनी की आय बढ़ाने तथा उसमें स्थिरता लाने के लिए बंगाल ,उड़ीसा व बिहार में स्थाई बंदोबस्त लागू किया। इस व्यवस्था में जमींदारों को भू-स्वामी मान लिया गया।
भारत आगमन के समय से ही ब्रिटिश कंपनी का उद्देश्य अधिकतम मात्रा में शोषण करना था। जब कार्नवालिस भारत आया तो उसने आय बढ़ाने के लिए यहाँ की भू-राजस्व व्यवस्था में सुधार किया लेकिन कार्नवालिस भी भारत की व्यवस्था से बहुत परिचित नहीं था। भारत में जमींदार और किसान दो ही वर्ग थे। ऐसे में कार्नवालिस के समक्ष तीन प्रश्न थे।
- जमीन का समझौता किसके साथ किया जाये
- कर की दर क्या रखी जाये
- समझौता कितने वर्षो के लिए किया जाये
- जमीदारों के साथ समझौता कर लिया
- कर की दर 10 /11 भाग सरकार को तथा 1 /11 भाग जमीदारों निर्धारित किया गया
रैय्यतवाड़ी व्यवस्था - रैय्यतवाड़ी व्यवस्था को पहली बार 1792 ई० में मद्रास के बारामहल जिले में कैप्टन रीड एवं मुनरो लागू किया गया। इस व्यवस्था में किसानो से सीधा संबंध स्थापित किया गया था। यह व्यवस्था लगभग भारत के 49 % भाग पर लागू की गयी। इस व्यवस्था को मद्रास,बम्बई और असम के कुछ भागो में लागू किया गया। इस व्यवस्था में सरकार ने रैयतों अर्थात किसानो से सीधा संपर्क किया। अब रैयतों को भूमि के मालिकाना हक़ तथा कब्जादारी अधिकार दे दिये गए तथा वे व्यक्तिगत रूप से स्वयं सरकार को लगान अदा करने के लिए उत्तरदायी थे। सरकार द्वारा इस व्यवस्था को लागू करने का उद्देश्य आय में वृद्धि के साथ-साथ बिचौलियों (जमीदारों )के वर्ग को समाप्त करना था।
महालवाड़ी व्यवस्था - यह स्थायी बंदोबस्त और रैय्यतवाड़ी के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा उत्तरप्रदेश,पंजाब ,मध्यप्रदेश में लागू किया गया इस व्यवस्था के जन्मदाता हाल्ट मैकेन्जी थे। इस व्यवस्था में कर प्रत्येक महाल (गाँव ) के लिए कर निश्चित किया गया। यह भारत के 30 % क्षेत्र पर लागू की गयी।
अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
- कार्नवालिस को सिविल सर्विस का जनक भी माना जाता है। इसने पुलिस थाने की स्थापना की करायी तथा SP का पद बनाया इसने न्याय शक्ति और राजस्व शक्ति में बटबारा भी किया कार्नवालिस ने ही भारत में सबसे पहले दास प्रथा पर रोक लगायी कार्नवालिस की समाधी उत्तरप्रदेश के गांजीपुर जिले में स्थित है।


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