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स्वराज्य पार्टी की स्थापना तथा उद्देश्य और कार्य एवं उपलबिध्याँ आधुनिक भारत का इतिहास
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स्वराज्य दल की स्थापना
स्वराज्य दल की स्थापना को असहयोग आंदोलन के स्थगन की प्रतिक्रिया के रूप में समझा जा सकता है। गाँधी जी ने चौरा-चोरी के हिंसात्मक काण्ड के कारण असहयोग आंदोलन के स्थगन की घोषणा कर दी जबकि जनता में राष्ट्रीय चेतना चरमोत्कर्ष पर थी। जिस कारण कांग्रेस का एक वर्ग परिषदों में प्रवेश कर सरकार के कार्यो में बाधा डालने की योजना पर कार्य करने लगा। चितरंजन दास एवं मोतीलाल नेहरू ने स्वराज्य पार्टी की स्थापना की। चितरंजन दास इसके अध्यक्ष बने
स्वराज्य दल के प्रमुख उदेश्य
- स्वराज्य प्राप्त करना
- सरकारी कार्यो में बाधा उत्पन्न करना
- अंग्रेजो की नीतियों का विरोध करना
- राष्ट्रीय चेतना का विकास करना
- चुनाव लड़कर कौंसिलों में प्रवेश करना
केन्द्रीय विधानसभा में स्वराज्य दल के सदस्यों (विट्ठलभाई ,चितरंजन दास ,मोतीलाल नेहरू ) एवं अन्य सहयोगियों ने स्वतंत्र दल के साथ मिलकर संयुक्त मोर्चा बनाया और सरकार के समक्ष माँगे प्रस्तुत की सरकार द्वारा इन्हे न माने जाने पर उनके कार्यो में अड़चने डाली। 1926 के पश्चात् स्वराज्य पार्टी का विघटन हो गया।
Note
1923 में चितरंजन दास और मोतीलाल नेहरू ने मिलकर इलाहबाद के आनंद भवन में स्वराज्य पार्टी की स्थापना की क्योकि अब यह नेता सड़क की राजनीति बंद करके अब सदन की राजनीति करना चाहते थे। 1925 के चुनाव में स्वराज्य पार्टी ने विट्ठल भाई पटेल को विधानसभा का अध्यक्ष बनबाने में सफल रहे लेकिन अगले वर्ष ही चितरंजन दास की मृत्यु हो गयी और स्वराज्य पार्टी कमजोर हो गयी
स्वराज्य पार्टी से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पूंछे गए कुछ महत्वपूर्ण तथ्य
Q 1 . देशबंधु के नाम से प्रसिद्ध है।
Ans - चितरंजन दास
Q 2 . स्वराज्य आम जनता के लिए होना चाहिए केवल वर्गों के लिए नहीं,के प्रसिद्ध सूत्र की घोषणा की
Ans - सी. आर. दास ने
Q 3 . सेंट्रेल लेजिस्लेटिव एसेम्बली का प्रथम भारतीय अध्यक्ष (स्पीकर ) था
Ans - विट्ठल भाई पटेल
Q 4 . स्वराज्य पार्टी का निर्माण करने के लिए कांग्रेस के अध्यक्ष पद से त्यागपत्र दिया था
Ans - सी.आर. दास ने
Q 5 . 16 दिसंबर 1922 को इंडिपेंडेंट पार्टी बनाने का निर्णय लिया था
Ans - मदन मोहन मालवीय तथा मोतीलाल नेहरू
Q 6 . भारत में स्वराज्य पार्टी की स्थापना जिन कारणों से की गई वह है
Ans - गांधी जी द्वारा असहयोग आंदोलन वापस लेना ,कौंसिलों में प्रवेश कर तथा उन्हें काम न करने देकर 1919 के भारत शासन अधिनियम का उच्छेदन करना


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