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साम्प्रदायिक पंचाट (कम्युनल अवार्ड ) आधुनिक भारत का इतिहास
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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री मेकडॉनल्ड ने 1932 में साम्प्रदायिक पंचाट की घोषणा कर दी जिसमें भारत के हरिजनों के लिए भी अलग निर्वाचक मण्डलों की घोषणा कर दी। भारत को तोड़ने और जातियों में विभक्त करने के लिए ब्रिटिश सरकार की यह एक कूटनीतिक चाल थी। कांग्रेस और भारत के लिए यह आघात था। गाँधीजी ने 21 दिनों के उपहास की घोषणा कर दी गाँधीजी और बाबा साहब अम्बेडकर के बीच पूना पैक्ट द्वारा साम्प्रदायिक पंचाट का हल खोजा गया।
साम्प्रदायिक पंचाट इसके अंतगर्त मुसलमानों की तरह ही दलितों को भी अलग से साम्प्रदायिक निर्वाचन का अधिकार दिया गया था लेकिन गाँधीजी ने यरमदा जेल से ही इसके विरुद आमरण अनशन शुरू कर दिया फिर मालवीय जी व राजेन्द्र प्रसाद के सहयोग से गाँधी अम्बेडकर पैक्ट हुआ इसे पूना पैक्ट के नाम से भी जाना जाता है। यह दलित वर्ग से संबंधित था इसमें साम्प्रदायिक पंचाट को समाप्त करते हुए संयुक्त निर्वाचन को स्वीकार किया गया तथा दलितों के लिए सीटों की संख्या बढ़ाते हुए 71 से 147 कर दी गयी फिर गाँधीजी दलितों के सुधार के लिए हरिजन सेवक संघ की स्थापना की इसके पहले अध्यक्ष घनश्याम दास बिड़ला बनाये गए तथा गाँधी जी ने हरिजन नामक पत्र भी निकाला इसी के साथ गाँधीजी ने छुआछूत विरोधी आंदोलन भी चलाया
साम्प्रदायिक पंचाट एवं पूना पैक्ट से पूछे गए विभिन्न परीक्षाओं कुछ महत्वपूर्ण तथ्य
Q 1 . दलित वर्गों का संघ स्थापित किया गया था
Ans- बी. आर. अम्बेडकर ने
Q 2 . महात्मा गांधी क्षणिक भूत की भांति धूल उठाते है लेकिन स्तर नहीं किसने कहा था
Ans - अम्बेडकर ने
Q 3 . पूना समझौते का उद्देश्य था
Ans - दलित वर्ग को प्रतिनिधित्व देना
Q 4 . सांप्रदायिक पंचाट ने पृथक चुनाव क्षेत्र एवं आरक्षित सीटे आवंटित की थी
Ans - मुसलमानो ,सिक्खो तथा अनुसूचित जातियों को


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